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News Highlights provides you with the best compilation of the Daily News Highlights taking place across the globe: National, International, Sports, Science and Technology, Banking, Economy, Agreement, Appointments, Ranks, and Report and General Studies

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DAINIK JAGRAN

1.

आज से अमेरिका में भारतीय सामानों पर सबसे अधिक 50% शुल्क

पचास प्रतिशत शुल्क लगाने को घोषणा के बाद भी अमेरिकी शर्तों के आगे नहीं झुकने की कीमत भारत को बुधवार से चुकानी होगी। 27 अगस्त से भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाली वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लगेगा जो अन्य देशों की तुलना में सबसे अधिक है। अभी तक यह शुल्क 25 प्रतिशत था। इसके अलावा पारस्परिक शुल्क से पहले लगने वाले शुल्क भी लगेंगे। जैसे कारपेट निर्यात पर अप्रैल से पहले अमेरिकी बाजार में सिर्फ 2.9 प्रतिशत का शुल्क लगता था जो अब 52.9 प्रतिशत हो जाएगा। शुल्क में इस बेतहाशा बढ़ोतरी से भारतीय वस्तुएं अमेरिकी बाजार में काफी महंगी हो जाएंगी। इससे भारत का 30-35 अरब डालर का निर्यात प्रभावित होगा। अमेरिका कृषि, डेरी व मत्स्य जैसे सेक्टर में भारतीय बाजार को पूरी तरह शुल्क मुक्त करवाना चाहता है। 


2.

गोवध से शांति और सौहार्द को खतरा : हाई कोर्ट

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गोवध के एक मामले में आरोपित आसिफ की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए अपने फैसले में गाय को भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर बताया है। जस्टिस संदीप मोदगिल ने कहा कि गोवध केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्दपूर्ण और सार्वजनिक शांति के लिए गंभीर खतरा है। 


3.

पीएम के जापान दौरे से आगामी क्वाड शिखर सम्मेलन की स्थिति होगी स्पष्ट

अमेरिका के विलिमिंगटन में सितंबर, 2024 में क्वाड सदस्यों अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया और भारत के शीर्ष नेताओं की शिखर बैठक हुई थी। तब यह बताया गया था कि आगामी शिखर बैठक भारत में होगी। उसके बाद फरवरी, 2025 में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुलाकात वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई, तब यह बताया गया कि ट्रंप इस साल भारत दौरे पर क्वाड बैठक में हिस्सा लेने के लिए आएंगे। यह भी संकेत दिया गया कि बैठक सितंबर, 2025 में होगी। लेकिन, अभी तक इस बाबत कोई संकेत ना तो भारत की तरफ से और ना ही क्वाड के अन्य तीनों सदस्यों की तरफ से दिए गए हैं। क्वाड शिखर बैठक की तैयारियों को लेकर भी सामान्य तौर पर चारों देशों के बीच बैठक होती है, वह भी नहीं हुई। ऐसे में इस बात की चर्चा है कि क्या भारत और अमेरिका के बीच ट्रंप की शुल्क नीति को लेकर जो अनिश्चितता बनी है, उसका असर तो नहीं है। लेकिन, बहुत संभव है कि 30 अगस्त को जापान के प्रधानमंत्री शीगेरू इशीबा और पीएम मोदी के बीच होने वाली बैठक के बाद आगामी क्वाड शिखर सम्मेलन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो।)  


4.

द्विपक्षीय संबंधों पर मोदी चिनफिंग वार्ता के बाद अहम घोषणा संभव

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी जापान की यात्रा के बाद 31 अगस्त को दो दिवसीय दौरे पर चीन पहुंचेंगे। यहां उनके और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच होने वाली बैठक भारत एवं चीन के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होने वाली है। अक्टूबर, 2024 के बाद इन दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी बैठक होगी। इस बैठक के बाद द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कुछ अहम घोषणाएं की जाएंगी। इसमें दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान की शुरुआत करना, भारत को चीन से दुलर्भ धातुओं की आपूर्ति को फिर से बहाल करने के साथ ही कारोबारी घाटे को कम करने के लिए कुछ उपायों का एलान संभव है। सूत्रों ने बताया कि बैठक की अवधि कम ही रहेगी, लेकिन इसका एजेंडा काफी व्यापक है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शुल्क नीति की वजह से भारत एवं अमेरिका के रिश्तों में आए मौजूदा तनाव को देखते हुए मोदी और चिनफिंग की इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर होगी। 


5.

बिहार में 100 करोड़ से अधिक निवेश पर कंपनियों को मिलेगी मुफ्त जमीन

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक नई प्रोत्साहन नीति की घोषणा की है। इस नीति के तहत 100 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली कंपनियों को 10 एकड़ जमीन मुफ्त दी जाएगी। मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज (बिहार इंडस्ट्रियल इंवेस्टमेंट प्रमोशन पालिसी) 2025 को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 26 प्रस्तावों को स्वीकृति मिली। 


6.

सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकी बदलाव से देश की सुरक्षा को खतरा : अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चेताया है कि सीमावर्ती इलाकों की जनसांख्यिकी को साजिश के तहत जानबूझकर बदला जा रहा है, जिससे सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सीमांत जिलों के जिलाधिकारियों से कहा कि सीमा के 30 किलोमीटर के दायरे में होने वाले धार्मिक अतिक्रमण हटाए जाने चाहिए।


7.

बिलों को मंजूरी राज्यपाल और राष्ट्रपति ही दे सकते

महाराष्ट्र सरकार ने प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट में अपने पक्ष को रखते हुए स्पष्ट किया कि विधेयकों को मंजूरी देने का अधिकार केवल राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास है, जबकि कोर्ट इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। मंगलवार को महाराष्ट्र सहित भाजपा शासित आठ राज्यों ने केंद्र सरकार के रुख का समर्थन करते हुए विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए राज्यपाल और राष्ट्रपति के लिए समय सीमा निर्धारित करने के विरोध में अपनी बात रखी। इन राज्यों का कहना है कि संविधान में इस संबंध में कोई समय सीमा नहीं है, इसलिए कोर्ट भी ऐसा नहीं कर सकता।


8.

ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस दो युद्धपोत एक साथ नौसेना में शामिल

समुद्र में भारत की ताकत और बढ़ गई है। अग्रिम पंक्ति के दो बहुउपयोगी स्टेल्थ युद्धपोत आइएनएस उदयगिरि और अइएनएस हिमगिरि को मंगलवार को नौसेन में शामिल किया गया। देनों युद्धपीत आठ ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस है। इनमें स्वदेशी उन्नत हथियारों और सेंसर भी लगे हैं। 


9.

महाभारत की तरह शस्त्र व शास्त्र दोनों को साथ लेकर चलना होगा: सीडीएस

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि हमें महाभारत काल की तरह शस्त्र और शास्त्र देनों को साथ लेकर चलना होगा। महान योद्धा अर्जुन ने शस्त्र घलाने में दक्षता हासिल की, लेकिन शास्त्र कव ज्ञान भगवान श्रीकृष्ण से प्राप्त किया। एयर डिफेंस सिस्टम 'सुदर्शन चक्र' देश के लिए दाल और तलवार' की तरह कार्य का करेगा। इसके लिए मजबूत दांचे का विकास करना होगा। हम शांति प्रिय देश हैं, मगर शांति बनाए रखना है तो युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। 


10.

स्वदेशी एयर डिफेंस, फाइटर जेट और युद्धपोत से निर्णायक प्रहार की तैयारी

चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान ने कहा है कि अगर हम शांति चाहते हैं तो हमें युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि आपरेशन सिंदूर जारी है ऐसे में हमारी रक्षा तैयारी उच्च स्तर की होनी चाहिए। आइये जानते हैं कि आपरेशन सिंदूर शुरू होने के बाद से भारत पाकिस्तान और चीन के देहरे खतरे से निपटने के लिए किस तरह की तैयारी कर रहा है? 


11.

हर राज्य का कृषि रोडमैप बनेगा: शिवराज

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र हर राज्य का कृषि रोडमैप तैयार कर रही है। इसके तहत राज्यवार फसलों, जलवायु, भूमि व जल की उपलब्धता का विश्लेषण किया जाएगा, जिससे पैदावार में चुनौतियों का समाधान किया जा सके। राज्यों में पैदावार बढ़ाने के लिए शोध कार्य कराए जाएंगे। 


12.

अमेरिका नहीं चाहता भारत का उभार

भारत द्वारा 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद अमेरिका द्वारा उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों का कोई प्रभाव न होते देख और चीन एवं इस्लामिक कट्टरपंथ के उभार से चिंतित अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने यह निर्णय लिया कि भारत से कटकर एशिया की भूराजनीति चलाना संभव नहीं है। हालांकि उस दौर में दोनों देशों के संबंधों में इतनी कटुता आ चुकी थी कि एकदम से सब कुछ सामान्य हो पाना संभव नहीं था। इसलिए भारत और अमेरिका कैसे एशिया की अगली सदी को मिलकर गढ़ सकते हैं, इस पर चर्चा के लिए अमेरिकी उप विदेश मंत्री स्ट्रोब टालबोट और भारतीय विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बीच 11 दौर की गुप्त वार्ता विश्व में अलग-अलग स्थानों पर हुई। इन वार्ताओं से अमेरिका में यह सहमति बनी कि भारत के सामरिक उदय को सुनिश्चित किया जाना पूरे एशिया और समूचे विश्व की सुरक्षा और स्थिरता के लिए आवश्यक है। यह कुछ-कुछ वैसा ही था, जैसा निक्सन और किसिंजर द्वारा 1970 के दशक में यह तय करना कि अमेरिका सोवियत संघ को कमजोर करने के लिए चीन का उदय सुनिश्चित करेगा। टालबोट जसवंत वार्ता की परिणति ही भारत के ऊपर से अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाने, कारगिल युद्ध के समय राष्ट्रपति क्लिंटन के भारत की ओर झुकाव के रूप में दिखाई दी। भारत के उदय को सुनिश्चित करने की इस नीति के पक्षधर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों ही बने। क्लिंटन के बाद रिपब्लिकन राष्ट्रपति जार्ज बुश ने पहले प्रधानमंत्री वाजपेयी और बाद में मनमोहन सिंह के साथ मिलकर भारत-अमेरिका परमाणु समझौते की रूपरेखा तैयार की और उसे मूर्त रूप भी दिया गया। इसके जरिये भारत को परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए बिना भी जिम्मेदार परमाणु शक्ति के तौर पर स्वीकारा गया और अमेरिका ने चीन के विरोध को दरकिनार करते हुए भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता संगठन का सदस्य भी बनवाया। 

भारत द्वारा 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद अमेरिका द्वारा उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों का कोई प्रभाव न होते देख और चीन एवं इस्लामिक कट्टरपंथ के उभार से चिंतित अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने यह निर्णय लिया कि भारत से कटकर एशिया की भूराजनीति चलाना संभव नहीं है। हालांकि उस दौर में दोनों देशों के संबंधों में इतनी कटुता आ चुकी थी कि एकदम से सब कुछ सामान्य हो पाना संभव नहीं था। इसलिए भारत और अमेरिका कैसे एशिया की अगली सदी को मिलकर गढ़ सकते हैं, इस पर चर्चा के लिए अमेरिकी उप विदेश मंत्री स्ट्रोब टालबोट और भारतीय विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बीच 11 दौर की गुप्त वार्ता विश्व में अलग-अलग स्थानों पर हुई। इन वार्ताओं से अमेरिका में यह सहमति बनी कि भारत के सामरिक उदय को सुनिश्चित किया जाना पूरे एशिया और समूचे विश्व की सुरक्षा और स्थिरता के लिए आवश्यक है। यह कुछ-कुछ वैसा ही था, जैसा निक्सन और किसिंजर द्वारा 1970 के दशक में यह तय करना कि अमेरिका सोवियत संघ को कमजोर करने के लिए चीन का उदय सुनिश्चित करेगा। टालबोट जसवंत वार्ता की परिणति ही भारत के ऊपर से अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाने, कारगिल युद्ध के समय राष्ट्रपति क्लिंटन के भारत की ओर झुकाव के रूप में दिखाई दी। भारत के उदय को सुनिश्चित करने की इस नीति के पक्षधर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों ही बने। क्लिंटन के बाद रिपब्लिकन राष्ट्रपति जार्ज बुश ने पहले प्रधानमंत्री वाजपेयी और बाद में मनमोहन सिंह के साथ मिलकर भारत-अमेरिका परमाणु समझौते की रूपरेखा तैयार की और उसे मूर्त रूप भी दिया गया। इसके जरिये भारत को परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए बिना भी जिम्मेदार परमाणु शक्ति के तौर पर स्वीकारा गया और अमेरिका ने चीन के विरोध को दरकिनार करते हुए भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता संगठन का सदस्य भी बनवाया। 


13.

सुप्रीम कोर्ट में कोई मामला अटका हो तो

इन दिनों सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ राष्ट्रपति की ओर से संदर्भित ऐसे प्रश्नों पर विचार कर रही है कि जब संविधान में विधेयकों पर निर्णय लेने हेतु राज्यपाल और राष्ट्रपति के लिए कोई समयसीमा तय नहीं है तो क्या अदालत समयसीमा तय कर सकती है? राष्ट्रपति ने इस और इस जैसे कुल 14 प्रश्न सुप्रीम कोर्ट को इसलिए संदर्भित किए थे, क्योंकि इसी वर्ष अप्रैल में तमिलनाडु के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि राज्यपाल की ओर से दस विधेयकों को लंबे समय तक रोक कर रखना और उन पर कोई निर्णय न लेना अवैध और मनमाना है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्यपाल के पास विधानसभा से पारित विधेयकों को रोके रखने की कोई वीटो पावर नहीं। इसे ऐतिहासिक बताए जाने वाले फैसले ने इसलिए हैरान किया, क्योंकि एक तो ऐसा आदेश देते हुए राज्यपाल के पास लंबित सभी दस विधेयकों को स्वीकृत करार दिया गया और दूसरे, यह आदेश दो सदस्यीय पीठ ने दिया। इसमें यह भी व्यवस्था दी कि राज्यपालों के लिए विधेयकों पर एक माह में फैसला लेना होगा और यदि ऐसा नहीं किया जाता तो ऐसे मामलों की न्यायिक समीक्षा हो सकती है। आदेश में यह भी कहा गया कि विधेयकों पर फैसला लेने के मामले में राज्यपालों की तरह राष्ट्रपति के समक्ष भी समयसीमा है। इसने और ओर से इस फैसले के खिलाफ 14 प्रश्न संदर्भित किए गए। 


14.

पर्यटन, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण

मलेशिया की मेजबानी में आज विश्व पर्यटन दिवस 'टूरिज्म एंड सस्टेनेबल ट्रांसफार्मेशन' (पर्यटन और सतत परिवर्तन) थीम के साथ दुनिया भर में मनाया जा रहा है। वर्ष 1980 से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य पर्यटन की विविध महत्ता को समझना और इसे समावेशी, समतामूलक और पर्यावरण अनुकूल बनाना है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को आनंददायक के साथ-साथ टिकाऊ और जिम्मेदार भी बनाया जा सके। 


15.

बदलते दौर में -भारत-रूस संबंध

बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में अमेरिका, रूस और चीन अपने-अपने हित साध रहे हैं। ऐसी स्थिति में भारत को रूस के साथ मित्रता, अमेरिका के साथ साझेदारी और चीन के साथ सावधानी की त्रिस्तरीय नीति अपनानी चाहिए। यही संतुलित दृष्टिकोण भारत को न केवल अपनी आर्थिक और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगा, बल्कि वैश्विक मंच पर उसेएक जिम्मेदार, स्वतंत्र और निर्णायक शक्ति के रूप में भी स्थापित करेगा) 


16.

2030 तक वैश्विक पवन ऊर्जा में 10% होगी भारत की हिस्सेदारी: प्रल्हाद जोशी

सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से अपनी जगह बनाने के बाद पवन ऊर्जा सेक्टर में भी भारत की पहचान स्थापित हो रही है। भारत न केवल पवन ऊर्जा उत्पादन में एक प्रमुख देश के तौर पर उभर रहा है, बल्कि इससे जुड़े उपकरणों के निर्माण में भी अपनी क्षमता मजबूत कर रहा है। यह बात केंद्रीय नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा (एमएनआरई) मंत्री प्रल्हाद जोशी ने ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (जीडब्लूईसी) की रिपोर्ट को जारी करने के अवसर पर भेजे गए संदेश में कही। 


17.

अतिरिक्त शुल्क लागू होने से पहले भारत-अमेरिका के बीच टू प्लस टू वार्ता

भारतीय आयात पर 50 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लागू होने की अवधि शुरू होने से एक दिन पूर्व भारत-अमेरिका के विदेश एवं रक्षा मंत्रालय के अफसरों के बीच वार्ता हुई। बैठक में द्विपक्षीय मुद्दों संग क्षेत्रीय रक्षा से जुड़ी गतिविधियों एवं सझा रणनीतिक प्राथमिकताओं पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। दोनों देशों के बीच कारोबार से जुड़े मुचें, ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, दुर्लभ धातुओं के खनन व आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग पर भी बातचीत हुई। यह चार्ता सोमवार को वर्चुअल माध्यम से हुई, जिसके बारे में विदेश मंत्रालय ने मंगलवार देर रात जानकारी दी। यह साफ नहीं है कि ट्रंप प्रशासन की तरफ से लगाए शुल्क के मुद्दे पर बात हुई या नहीं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दो दिन पूर्व कहा था कि दोनों देश संपर्क में हैं। वैसे इस बार्ता का शुल्क संबंधी फैसलों पर असर होने के संकेत नहीं हैं।


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