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News Highlights provides you with the best compilation of the Daily News Highlights taking place across the globe: National, International, Sports, Science and Technology, Banking, Economy, Agreement, Appointments, Ranks, and Report and General Studies

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DAINIK JAGRAN

1.

दो स्लैब वाली जीएसटी प्रणाली का रास्ता साफ

दवे स्लैब वाली जीएसटी प्रणाली का रास्ता साफ हो गया है। जीएसटी के चार स्लैब की जगह दो स्लैब रखने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव को जीएसटी काउंसिल की तरफ से गठित मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने अपनी मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार ने 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत के जीएसटी स्लैब को समाप्त कर सिर्फ पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत का स्लैब रखने का प्रस्ताव स्खा है। विलासिता संबंधी एवं पान-मसाला, गुटका जैसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं को अलग से 40 प्रतिशत स्लैब में रखने का प्रस्ताव है। गुरुवार को इस प्रस्ताव को बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाले जीओएम के समक्ष प्रस्तुत किया गया। जीओएम ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी देते हुए जीएसटी काउंसिल के पास भेज दिया। अब जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में केंद्र के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला किया जाएगा। काउंसिल में किसी भी फैसले के लिए केंद्र के साथ-साथ सभी राज्यों का सहमत होना जरूरी है। देश का वित्त मंत्री काउंसिल का चेयरमैन होता है।


2.

संसद से बिल पारित होते ही बंद होने लगे आनलाइन मनी गेम

आनलाइन मनी गेमिंग पर रोक लगाने वाले विधेयक पर संसद की मुहर लगने के बाद ऐसे एप्स ने अपने प्लेटफार्मों पर मनी गेम्स बंद करना शुरू कर दिया है। इनमें मोबाइल प्रीमियर लीग (एमपीएल) और जुपी शामिल हैं। जल्द ही ड्रीम-11, माई 11 सर्किल, पोकरबाजी और रमी सर्किल जैसे फैंटेसी और कार्ड गेमिंग एप्स भी अपने प्लेटफार्मों पर मनी गेमिंग बंद कर सकते हैं। माना जा रहा है कि नए कानून के अमल में आने से देश के 3.8 अरब डालर के आनलाइन गेमिंग उद्योग को झटका लग सकता है।


3.

रूस के बाद अब चीन ने कहा- भारतीय उत्पादों के लिए हमारे दरवाजे खुले

रूस से तेल खरीद के चलते अमेरिका द्वारा भारत के खिलाफ छेड़ी गई टैरिफ जंग के बीच चीन ने भारतीय उत्पादों के लिए अपने दरवाजे खोलने की घोषणा की है। चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा है कि भारत और चीन एशिया के विकास के दो प्रमुख इंजन हैं और दोनों देशों के सहयोग से पूरी दुनिया को लाभ होगा। उन्होंने ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाने के कदम का कड़ा विरोध किया और कहा- चीन इस मामले में भारत के साथ खड़ा है। 'हम मिलकर अपनी रणनीतियों और सहयोग का दायरा बढ़ाने के लिए तैयार हैं। हम सभी भारतीय वस्तुओं का चीनी बाजार में स्वागत करते हैं। बता दें कि इसके पहले रूस ने भी ऐसी ही बात कही है।


4.

असम में वयस्कों का नहीं बनेगा नया आधार कार्ड : हिमंत

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार घोषणा की कि राज्य में 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को पहली बार आधार कार्ड नहीं मिलेगा। यह ऐहतियाती कदम घुसपैठियों को भारतीय नागरिकता मिलने से रोकने के लिए उठाया गया है। कैबिनेट बैठक के बाद हिमंत ने कहा कि अगर किसी को अभी तक आधार कार्ड नहीं मिला है तो उसे एक सितंबर से केवल एक महीने का समय दिया जाएगा, ताकि वह आधार कार्ड के लिए आवेदन कर सके। 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को अक्टूबर से पहली बार आधार कार्ड जारी नहीं किए जाएंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से अधिक उम्र के चाय बागान मजदूरों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को अगले एक वर्ष तक नए आधार कार्ड मिलते रहेंगे। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) के अनुसार, आधार नामांकन के लिए कोई उम्र सीमा निर्धारित नहीं है।


5.

ईपीएस-95 के तहत आधे से अधिक पेंशनभोगियों को 1,500 से भी कम पेंशन

सरकार ने संसद को बताया कि ईपीएफओ द्वारा संचालित कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (ईपीएस-95) के तहत हर दूसरे पेंशनभोगी को 1,500 रुपये से कम मासिक पेंशन मिलती है। श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे द्वारा साझा किए गए 31 मार्च 2025 तक के डाटा से यह भी पता चला है कि इस योजना के तहत 81,48,490 पेंशनभोगियों में से केवल 0.65 प्रतिशत यानी 53,541 पेंशनभोगियों को छह हजार रुपये से अधिक की मासिक पेंशन मिलती है।


6.

अगर राज्यपाल कार्य नहीं करते तो क्या कोर्ट नहीं कर सकता हस्तक्षेप

सुप्रीम कोर्ट में प्रेसीडेंशियल रेफरेंस पर सुनवाई के दौरान गुरुवार को केंद्र सरकार ने संविधान में दी गई शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि राज्यपाल के विधेयकों पर निर्णय लेने के मामले में अदालत को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। न्यायसंगत लगने पर भी यह अदालती हस्तक्षेप का आधार नहीं हो सकता। इन दलीलों पर कोर्ट ने सवाल किया कि अगर संवैधानिक पदाधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करता, राज्यपाल विधानसभा से पारित विधेयकों पर कोई कार्रवाई नहीं करते तो क्या होगा। क्या अदालत के हाथ बंधे हैं। क्या अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती, क्या वह शक्तिहीन है। केंद्र की पैरोकारी कर रहे सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हर समस्या का समाधान सुप्रीम कोर्ट नहीं है। समाधान राजनीतिक और लोकतांत्रिक हो सकता है। मामले में मंगलवार को फिर सुनवाई होगी। प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली एक संविधान पीठ आजकल प्रेसीडेंशियल रेफरेंस पर सुनवाई कर रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 14 संवैधानिक सवालों पर सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी है। उन्होंने पूछा है कि जब संविधान में विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए राज्यपाल और राष्ट्रपति के वास्ते कोई समय सीमा तय नहीं है तो क्या कोर्ट समय सीमा तय कर सकता है।


7.

'लिपुलेख पर नेपाल का दावा ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं'

भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख दर्रे को लेकर सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। भारत और चीन के लिपुलेख दर्रे के जरिए व्यापार फिर से शुरू करने पर नेपाल ने आपत्ति जताई। ऐसे में बुधवार को भारत ने नेपाल द्वारा जताई गई आपत्ति पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। भारत ने नेपाल द्वारा लिपुलेख दरें को लेकर किए गए दावों को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि नेपाल का इस इलाके पर दावा न तो सही है और न ही ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है।


8.

आवश्यक रक्षा कवच है सुदर्शन चक्र

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं कीं। ऐसी ही एक घोषणा राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भी हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित महसूस होना चाहिए। इसे सुनिश्चित करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र को मूर्त रूप दिया जाएगा। इसके अंतर्गत अगले दस वर्षों के दौरान स्वदेशी तकनीकी विकास के माध्यम से भारत के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों का सुरक्षा कवच मजबूत किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण से प्रेरणा लेते हुए हमने सुदर्शन चक्र की राह चुनी है। इस तंत्र से संबंधित समस्त शोध, विकास एवं विनिर्माण भारत में ही किया जाएगा। यह भी एक संयोग ही है कि भारत की प्रमुख स्ट्राइक कोर में से एक 21 कोर को भी सुदर्शन चक्र ही कहते हैं। अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित यह आक्रामक इकाई दुश्मन को उसके इलाके में गहरी चोट पहुंचाने की क्षमताओं से लैस है। पिछले कुछ समय में वैश्विक सुरक्षा सामरिक परिदृश्य बहुत तेजी से बदला है और निरंतर परिवर्तनों से गुजर रहा है। इस परिदृश्य में मिसाइल डिफेंस प्रणाली राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतियों का आधार स्तंभबन गई है। इस क्रम में उन्नत तकनीकें मिसाइल खतरों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने, इंटरसेप्ट करने और निष्क्रिय करने के लिए डिजाइन की गई हैं। इनके काम का दायरा छोटी रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलों से लेकर अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों यानी आइसीबीएम तक फैला हुआ है।


9.

बढ़ाना होगा प्रकृति से जुड़ाव

हाल में यूके के डर्बी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर माइल्स रिचर्डसन द्वारा किए गए एक अध्ययन ने यह चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा कि पिछले दो सौ वर्षों में इंसानों का प्रकृति से जुड़ाव 60 प्रतिशत कम हो चुका है। यह अध्ययन वर्ष 1800 से लेकर 2020 तक के आंकड़ों पर आधारित है। इसमें किताबों और साहित्य में प्रयुक्त प्राकृतिक शब्दों का विश्लेषण किया गया है। परिणाम दिखाते हैं कि 1990 तक ऐसे शब्दों के प्रयोग में 60 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी थी। यानी प्रकृति केवल हमारे जीवन से नहीं, हमारी भाषा-संस्कृति से भी गायब होती जा रही है। अध्ययन में शहरीकरण और वन्यजीवों की कमी से जुड़े आंकड़ों को भी शामिल किया गया है और कंप्यूटर माडलिंग के जरिए यह ट्रैक किया गया है कि किस तरह दो शताब्दियों में इंसानों का प्रकृति से रिश्ता धीरे-धीरे टूटता चला गया है।


10.

रोजगार सृजन की दिशा में सार्थक प्रयास

आज की नई पीढ़ी अब केवल नौकरी तलाशने वाली भीड़ नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सक्रिय शक्ति है। इस पहल से युवाओं को अवसर, आत्मविश्वास और सामाजिक सुरक्षा के नए क्षितिज मिलेंगे। उनका योगदान केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विकसित भारत की सामूहिक यात्रा में गूंजेगा। अब असली प्रश्न यही है कि क्या प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना उन सपनों को यथार्थ में बदल पाएगी, जिन्हें लेकर आज का युवा आगे बढ़ रहा है? संकल्प और आस्था का यह संगम निश्चित ही देश को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह युवाओं और नियोक्ताओं दोनों के लिए समान अवसरों का द्वार खोलती है। लंबे समय से यह शिकायत रही है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं के पास रोजगार की कमी रहती है और कंपनियां भी बढ़ते श्रम खर्च की वजह से नई नियुक्तियों से कतराती हैं। यह योजना दोनों पक्षों के बीच की दूरी कम करती है।


11.

स्वास्थ्य सेवाओं में विसंगतियां

देश का स्वास्थ्य ढांचा पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुआ है। फिर भी इसमें कई विसंगतियां हैं, जिन्हें दूर किए बिना सभी को सस्ती और सुगम स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं प्रदान की जा सकती हैं


12.

अगस्त में तेजी से बढ़ीं निजी क्षेत्र की गतिविधियां

सर्विस सेक्टर की अगुआई में मांग में जोरदार उछाल के चलते भारत के निजी क्षेत्र की गतिविधियां अगस्त में रिकार्ड गति से बढ़ी। 12 सालों में यह पहली बार है जब कंपनियों को सबसे तेज गति से कीमतें बढ़ाने का मौका मिला। निजी क्षेत्र को लेकर आई यह रिपोर्ट एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में आर्थिक विकास में मंदी की उम्मीदों के विपरीत है।


13.

एक दशक में भारत में 68 अरब डालर का निवेश करेगा जापान

अगले एक दशक में जापान भारत में 68 अरब डालर (10 ट्रिलियन येन) का निवेश करने पर विचार कर रहा है। इसकी घोषणा इस महीने के अंत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जापान दौरे में की जा सकती है। जापान की सरकारी समाचार एजेंसी क्योदो न्यूज ने कहा कि 68 अरब डालर के नए निवेश का एलान 2022 में शुरू किए गए पांच ट्रिलियन येन के निवेश लक्ष्य से अतिरिक्त है। यह निवेश ऐसे समय आ रहा है जब दोनों देश चीन के सामने मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने पर काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के बीच शिखर वार्ता के बाद इस निवेश का एलान किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा 29 अगस्त से तीन दिनों की होगी।


14.

लेटरल एंट्री की नियुक्तियों में आरक्षण लागू नहीं

सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि लेटरल एंट्री के माध्यम से की गई नियुक्तियों में आरक्षण लागू नहीं है। गौरतलब है कि लेटरल एंट्री का मतलब है सीधी भर्ती। यानी किसी तरह की परीक्षा के बिना उच्च पदों पर विशेषज्ञों की नियुक्ति। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लिखित उत्तर में कहा, 2018 से अब तक तीन बार (2018, 2021 और 2023) में विभिन्न सरकारी विभागों में संयुक्त सचिव/निदेशक/उप सचिव के स्तर पर 63 नियुक्तियां अनुबंध /प्रतिनियुक्ति के आधार पर की गई हैं। ये नियुक्तियां विशेष कार्यों के लिए की गई हैं। चूंकि, इनमें से प्रत्येक नियुक्ति एकल पद पर हुई है, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय के 'पीजीआइएमईआर चंडीगढ़ बनाम फैकल्टी एसोसिएशन और अन्य मामले में निर्णय के अनुसार आरक्षण लागू नहीं है।


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